अमेरिका में राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्प के समर्थकों द्वारा कैपिटल बिल्डिंग पर हमला किए जाने के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प को अपने ही समर्थकों की बेरुखी का सामना करना पड़ रहा है। कई रिपब्लिकन सीनेटर अब उनके समर्थन में खड़े होने को तैयार नहीं हैं। ट्रम्प द्वारा नियुक्त किए गए लोगों ने उस घटना के बाद इस्तीफ़ा तक दे दिया। वहीं कैपिटल बिल्डिंग में हुई हिंसा के बाद डेमोक्रेटिक नेता चाहते हैं कि राष्ट्रपति ट्रम्प जल्द से जल्द ऑफिस खाली करें। साथ ही उन पर दोबारा राष्ट्रपति पद पर चुनाव लड़ने से रोक लगाई जाए, इसे लेकर अब उनके खिलाफ महाभियोग लाया जा रहा है।

डेमोक्रेट्स नहीं चाहते हैं कि ट्रम्प फिर कभी भी सार्वजनिक पद पर आएं

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में बहुमत का दबदबा रखने वाले डेमोक्रेट्स ने वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को पद से हटाने के लिए मजबूर किए जाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। ट्रम्प 20 जनवरी को अपना पद छोड़ने वाले हैं। डेमोक्रेट्स नहीं चाहते हैं कि ट्रम्प फिर कभी भी सार्वजनिक पद पर आ सकें और साथ ही उनको पूर्व राष्ट्रपति के नाते कोई भी लाभ न मिल सके। वो उन सभी लाभों से वंचित रहें जो एक पूर्व राष्ट्रपति को मिलते हैं। सदन की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी ने जोर देकर कहा कि अगर ट्रम्प इस्तीफ़ा नहीं देते हैं या उपराष्ट्रपति 25वें संशोधन की धारा 4 को लागू नहीं करते हैं तो सदन ट्रम्प पर महाभियोग चलाएगा। अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य हकीम जेफ़्रीस कहते हैं, ”डोनाल्ड ट्रम्प को तुरंत कार्यालय से हटा दिया जाना चाहिए। महाभियोग लगाकर उनको दोषी ठहराया जाना चाहिए और 1600 पेंसिलवेनिया एवेन्यू से निकालकर हमेशा के लिए इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया जाना चाहिए।”

महाभियोग के प्रस्ताव के मसौदे में ट्रम्प के खिलाफ काफी कड़े शब्दों का इस्तेमाल

बता दें प्रस्ताव के मसौदे में काफी कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। और ट्रम्प पर राष्ट्रद्रोह का आरोप लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि ट्रम्प हिंसा भड़काने के गंभीर अपराध और दुष्कर्म में लगे हुए हैं। साथ ही इसमें कहा गया है कि ट्रम्प ने अपने राजनीतिक समर्थकों की भीड़ को चुनावों में अपनी जीत के झूठे दावों के साथ संबोधित किया। इसी के बाद गैर-कानूनी कार्य, हिंसा और विध्वंस का काम हुआ। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि ट्रम्प ने अधिकारियों को धमकाया कि वे चुनाव के नतीजों को पलट देंगे जिसमें कहा गया है कि ट्रम्प ने अमेरिका की सुरक्षा और शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण को गंभीर रूप से खतरे में डाला।

आधिकारिक अकाउंट से ट्रम्प के ट्वीट किए गए डिलीट

इधर ट्रम्प इस मौके का इस्तेमाल उन साढ़े सात करोड़ लोगों के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए कर रहे हैं जिन्होंने उन्हें वोट दिया था। अपने समर्थकों को महान देशभक्त कहते हुए उन्होंने अपने अकाउंट को प्रतिबंधित करने के लिए ट्वीटर पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें चुप नहीं कराया जा सकता। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक हैंडल से ट्वीट करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि वो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की स्थापना करेंगे। अपने समर्थकों को जुड़े रहने के लिए कहेंगे। हालांकि ट्वीटर ने आधिकारिक अकाउंट से किए गए इस ट्वीट को भी जल्दी ही डिलीट कर दिया।

ट्रम्प को रिपब्लिकन सहयोगियों का मिल रहा कुछ समर्थन

व्हाइट हाउस से ट्रम्प को बाहर करने के गहन प्रयास से ट्रम्प को रिपब्लिकन सहयोगियों का कुछ समर्थन मिल रहा है। हालांकि उनमें भी आपस में इस बात को लेकर मतभेद हैं कि ट्रम्प के युग के बाद पार्टी कैसे आगे बढ़ेगी। रिपोर्ट के मुताबिक उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कैपिटल में अराजकता के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प से खुद को दूर कर लिया है जिसे एक अलगाव के रूप में देखा जा रहा है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पेंस को फांसी देने की भी मांग की थी और एक मीडिया आउटलेट ने रिपोर्ट दी है कि उन्होंने 25वें संशोधन पर विचार करने की संभावना से इंकार नहीं किया है।

ट्रम्प की हार जीत के साथ ही प्रेस की स्वतंत्रता पर भी छिड़ी बहस

अगर महाभियोग की प्रक्रिया 11 जनवरी यानी आज से शुरू होती है तो भी इसे निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के 20 जनवरी को पदभार ग्रहण करने से पहले नहीं चलाया जाएगा। ट्रम्प ने अपनी ओर से प्रेस पर नकारात्मक होने का आरोप लगाया है। ऐसे में ट्रम्प की हार जीत के साथ ही प्रेस की स्वतंत्रता पर भी बहस होने लगी है। तमाम गतिविधियों के तहत यह कहा जा सकता है कि 20 जनवरी को बाइडन के शपथ ग्रहण समारोह से पहले अमेरिकी लोकतंत्र कई दिलचस्प पड़ाव का गवाह बन सकता है।

By anita

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