आज विश्व के विभिन्न देशों में द्रुत गति से हिंदी का प्रसार हो रहा है। वास्तव में भाषा, किसी भी सीमा में आबद्ध नहीं हो सकती। निरंतर प्रवाहमान भाषा ही विकसित और परिष्कृत होती है। हिंदी विश्वभाषा की क्षमताओं से संपन्न है। व्यापार,कृषि, उद्योग, मनोरंजन,अध्ययन-अध्यापन और विमर्श की भाषा हिंदी सभी सीमाओं को पार कर बढ़ती ही जा रही है। विश्व में 80 करोड़ लोग ऐसे हैं जो हिंदी बोल और समझ सकते हैं। यह विश्वभर में तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ से प्रसारित होता है हिंदी समाचार बुलेटिन

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 22 जुलाई 2018 से साप्ताहिक आधार पर हिंदी समाचार बुलेटिन का प्रसारण शुरू किया गया। यह दिवंगत पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के नेतृत्व में हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों में से एक था। संयुक्त राष्ट्र संघ का हिंदी में आधिकारिक ट्विटर हैंडल भी है। संयुक्त राष्ट्र संघ के आधिकारिक जालस्थल (वेबसाइट) पर मुख्य दस्तावेज हिंदी में उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, विश्व हिंदी सचिवालय का स्थायी भवन मॉरीशस में स्थित है।

दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में हिंदी में हो रहा शिक्षण कार्य

• भारत के पड़ोसी देश और दुनिया के अन्य देशों में से लगभग 46 देश ऐसे हैं जहां हिंदी में पठन-पाठन होता है।

• पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका,नेपाल, भूटान और म्यांमार इत्यादि देशों में हिंदी में पाठ्यक्रम चलते हैं।

• वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका के शिकागो, वर्जिनिया, टेक्सस, कोलंबिया और पेन्सिलेवानिया आदि विश्वविद्यालयों के दक्षिण एशिया अध्ययन विभाग के अंतर्गत हिंदी के अध्ययन-अध्यापन की सुविधा है।

• फिनलैंड के हेलसिंकी, स्वीडन के स्टॉकहोम और नार्वे के ओस्लो विश्वविद्यालय में हिंदी में पठन-पाठन होता है।

• चीन के पेइचिंग विश्वविद्यालय में भी हिंदी पढ़ाई जाती है।

वैश्विक बाजार में धाक जमा रही हिंदी

विश्‍व बाज़ार में हिन्‍दी भाषा का प्रभुत्व बढ़ रहा है। हिंदी उपभोक्ता वर्ग की भाषा है। आज उपभोक्‍ता सामग्री बनाने वाली बहुराष्‍ट्रीय कंपनियां वस्‍तुओं के साथ दी जाने वाली जानकारी हिन्‍दी में भी प्रकाशित कर रही है। इंटरनेट, स्मार्टफोन, गूगल की हिंदी सेवा व लगभग सभी वेबसाइटों व ऐप के हिंदी संस्करण ने भी हिंदी को खूब लोकप्रियता दिलाई है। वैश्विक बाजार में भारत की मजबूत स्थिति ने विदेशों में और विदेशियों से भी हिंदी को उचित आदर और सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विश्वव्यापी रूप ग्रहण कर रही है हिंदी

हिंदी विश्वव्यापी रुप ग्रहण कर रही है। स्वाभाविकता, सरलता और सद्भावना से ओत-प्रोत हिंदी भाषा विश्व मानव के विचारों को अभिव्यक्त करने में सक्षम है। हिंदी का विस्तार संतोषजनक है लेकिन वैश्विक भाषा बनने में तकनीक संबंधी चुनौतियों को दूर करना भी जरूरी होगा। हिंदी-अनुरागियों का यह विश्वास है कि हिंदी, विभेद आतंक और शोषण को दूर कर सर्वजन स्वीकृत भाषा बनेगी।

समूचे विश्व में लहरा रही हिंदी की कीर्ति पताका

आज विश्व हिंदी दिवस है। प्रेम, संवाद और मैत्री की भाषा हिंदी के वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है। हिंदी का फलक विस्तृत हो रहा है। दुनियाभर के विश्वविद्यालयों में हिंदी में अध्ययन-अध्यापन हो रहा है। कोई भी भाषा किसी परिधि में आबद्ध नहीं होती है, बल्कि जहाँ-जहाँ उसका व्यवहार किया जाता है, वहां भाषा विकसित होती जाती हैं। बीते वर्षों में हिंदी न केवल गतिशील हुई है अपितु वैश्विक स्तर पर सम्प्रेषण के सशक्त माध्यम के रूप में उभरी है।

कब हुई विश्व हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत

भाषा अनुरागियों द्वारा विश्वभर में हिंदी का उत्सव मनाया जाता है। प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी, 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था। इस तिथि की महत्ता और हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को विश्व हिंदी दिवस के रुप में मनाए जाने की घोषणा की थी।

दूतावासों में होता है शानदार आयोजन

विश्व के विभिन्न देशों में स्थित भारतीय दूतावासों में प्रमुखता से हिंदी दिवस का आयोजन किया जाता है।
नॉर्वे स्थित भारतीय दूतावास में प्रथम विश्व हिंदी दिवस का आयोजन किया गया था। इसी तरह दुनिया भर में स्थित भारतीय दूतावासों में हिंदी दिवस के अवसर पर विभिन्न प्रतियोगताओं का आयोजन किया जाता है। बच्चों को साहित्य की सरल किताबें भी भेंट की जाती है। उल्लेखनीय है कि भारत में स्थित विदेशी दूतावासों जैसे अमेरिका, चीन, पोलैंड के अधिकारी भी रुचि लेकर हिंदी सीखते हैं।

विश्वविद्यालयों से लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों में हिंदी का बोलबाला

हिंदी विश्व की पांच सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में सम्मिलित है। विश्वभर के 130 से भी अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा में अध्ययन-अध्यापन होता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने विस्तार हेतु हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग कर रही है। हिंदी में विज्ञापन दिए जा रहे हैं। हिंदी कम्युनिटी एक्सपर्ट की नियुक्तियां बड़ी संख्या में बहुराष्ट्रीय कंपनियों में हो रही है। इन सब में गूगल, अमेजॉन जैसी कंपनियां शामिल हैं।

जानिए क्या है विश्व हिंदी दिवस और हिंदी दिवस में अंतर

विश्व हिंदी दिवस और हिंदी दिवस दो अलग-अलग दिन हैं। विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी को मनाया जाता है, जबकि हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है। विश्व हिंदी दिवस, हिंदी के प्रचार-,प्रसार के उद्देश्य से मनाया जाता है। वहीं, 14 सितम्बर 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया था, इसीलिए इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाते हैं।

भाषा के सामने कुछ चुनौतियां भी

हिन्दी ने भाषा, व्याकरण, साहित्य, कला, संगीत के सभी माध्यमों में अपनी उपयोगिता, प्रासंगिकता एवं वर्चस्व कायम किया है। हिन्दी की यह स्थिति हिन्दी भाषियों और हिन्दी समाज की देन है। लेकिन हिन्दी समाज का एक तबका हिन्दी की दुर्गति के लिए जिम्मेदार है। अंग्रेजी बोलने वाला अधिक ज्ञानी और बुद्धिजीवी होता है यह धारणा हिन्दी भाषियों में हीन भावना ग्रसित करती है। हिन्दी भाषियों को इस हीन भावना से उबरना होगा। क्योंकि मातृभाषा में ही मौलिक विचार आते हैं। शिक्षा का माध्यम भी मातृभाषा होनी चाहिए। शिक्षा विचार करना सिखाती है और मौलिक विचार उसी भाषा में हो सकता है जिस भाषा में आदमी जीता है। जिस भाषा में आदमी जीता नहीं उसमें मौलिक विचार नहीं आ सकते। हिन्दी किसी भाषा से कमजोर नहीं है । हमें जरूरत है तो बस अपना आत्मविश्वास मजबूत करने की।

हिंदी की तेज विकास गति

बीसवीं सदी के अंतिम दो दशकों में हिन्दी का अन्तर्राष्ट्रीय विकास बहुत तेजी से हुआ है। विश्व के लगभग 150 विश्वविद्यालयों तथा सैंकडों छोटे-बड़े केन्द्रों में विश्वविद्यालय स्तर से लेकर शोध के स्तर तक हिन्दी के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था हुई है। विदेशों से हिन्दी में दर्जनों पत्र-पत्रिकाएं नियमित रूप से प्रकाशित हो रही हैं। हिन्दी भाषा और इसमें निहित भारत की सांस्कृतिक धरोहर सुदृढ और समृद्ध है। इसके विकास की गति बहुत तेज है।

विडम्बना ही है कि जिस भाषा को कश्मीर से कन्याकुमारी तक सारे भारत में समझा, बोला जाता हो, उस भाषा के प्रति घोर उपेक्षा व अवज्ञा के भाव, हमारे राष्ट्रीय हितों में किस प्रकार सहायक होंगे। हिन्दी का हर दृष्टि से इतना महत्व होते हुए भी प्रत्येक स्तर पर इसकी इतनी उपेक्षा क्यों? हिन्दी दिवस के अवसर पर आज हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिये की हम पूरे मनोयोग से हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में अपना सतत सहयोग प्रदान कर हिन्दी भाषा के बल पर भारत को फिर से विश्व गुरु बनवाने की दिशा में सकारात्मक प्रयास करेंगें।

By anita

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