केरल, हरियाणा, राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में पोल्ट्री, कौवों, प्रवासी पक्षियों की असामान्य मौत के बाद के बाद देश में बर्ड फ्लू का खतरा मंडराने लगा है। एक के बाद एक राज्यों में पक्षियों और पोल्ट्री के मरने के बाद एवियन इन्फ्लूएंजा फैलने की स्थिति को समझने और राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को इस बीमारी के नियंत्रण, रोकथाम और प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बैठक बुलाई।

चार राज्‍यों में इस बीमारी के फैलने की पुष्टि

बैठक में बताया गया कि अब तक, केवल चार राज्‍यों में इस बीमारी के फैलने की पुष्टि हुई है। केरल के प्रभावित जिलों में पक्षियों को मारने की कार्रवाई जारी है। वहीं इस बात पर बल दिया गया है कि जलाशयों, पक्षियों के बाजारों, चिड़िया घरों, पोल्‍ट्री फॉर्म्स, आदि के आसपास निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ मृत पक्षियों के शवों का उचित निपटान करने तथा पोल्ट्री फॉर्म्स में जैव-सुरक्षा को मजबूत बनाना सुनिश्चित किया जाए।

राज्य पशुपालन विभागों से नमूनों को एकत्र करने के निर्देश

राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे एवियन इन्फ्लूएंजा की किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें। राज्‍यों से पीपीई किट्स और पक्षियों को मारने की कार्रवाई के लिए आवश्‍यक सामान का पर्याप्‍त भंडार सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। इस दौरान इस बीमारी की स्थिति पर पैनी नजर बनाए रखने और मनुष्यों में इसके फैलने की आशंकाओं को टालने के लिए राज्‍य पशुपालन विभागों से नमूनों को एकत्र करने के लिए निर्देशित किया। साथ ही उन्‍हें समय पर निर्धारित प्रयोगशालाओं (आरडीडीएल/सीडीडीएल/आईसीएआर-एनआईएचएसएडी) में जमा कराने के अलावा स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ प्रभावी संपर्क और तालमेल सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया गया है।

दो केंद्रीय टीमें कर रहीं निगरानी

वन क्षेत्रों और जलाशयों के आसपास पाए जाने वाले प्रवासी पक्षियों की असामान्य मौतों के बारे में तत्काल जानकारी देने के लिए राज्‍य वन विभाग के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया गया है। राज्‍य सरकारों की सहायता करने के लिए एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है। इतना ही नहीं, दो केंद्रीय टीमों को निगरानी तथा महामारी संबंधी जांच के लिए प्रभावित राज्यों केरल, हरियाणा,राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश का दौरा करने के लिए तैनात किया गया है।

उबालने/पकाने के बाद पोल्ट्री या पोल्ट्री उत्‍पाद सुरक्षित

पोल्ट्री किसानों और आम जनता (अंडे और चिकन के उपभोक्ताओं) के बीच इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए राज्यों से कहा गया है कि अफवाहों से प्रभावित उपभोक्ताओं की प्रतिक्रियाओं को शांत किया जाए तथा इस बारे में जागरूकता बढ़ाई जाए कि उबालने/पकाने जैसी प्रक्रियाओं को अपनाने पर पोल्ट्री या पोल्ट्री उत्पाद सुरक्षित हैं।

By anita

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