पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई के महीनों में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। इस चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (AIMIM) भी दाव आजमाने की तैयारी कर रही है। बंगाल में ओवैसी की एंट्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किल बन सकती है। ओवैसी ने रविवार को बंगाल के एक लोकप्रिय युवा मुस्लिम नेता के शरण में जा पहुंचे।

रविवार को बंगाल पहुंचे ओवैसी ने हाल के महीनों में सत्तारूढ़ पार्टी के सबसे मुखर आलोचक के रूप में उभरने वाले अब्बासुद्दीन सिद्दीकी से हुगली में मुलाकात की। दो घंटे की बैठक के बाद, ओवैसी ने कहा कि बंगाल में हमारी पार्टी सिद्दीकी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। वही यह तय करेंगे कि एआईएमआईएम कैसे चुनाव लड़ेगी।  

हालांकि सिद्दीकी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। उन्होंने हा कि अपने अगले कदम की जल्द घोषणा करेंगे। बैठक की खबर से मुस्लिम नेताओं और टीएमसी मंत्रियों के बीच प्रतिक्रिया शुरू हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवैसी का एकमात्र उद्देश्य मुस्लिम वोटों को विभाजित करना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मदद करना है। आपको बता दें कि बीजेपी ने 294 विधानसभा सीटों वाली विधानसभा चुनाव में ‘अबकी बार 200 के पार’ का मंत्रा कार्यकर्ताओं को दिया है।

अब्बास सिद्दीकी ने हाल के महीनों में टीएमसी पर अल्पसंख्यक समुदाय की अनदेखी करने का आरोप लगया है। साथ ही यह भी कहा कि ममता ने मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है।

संयोग से, सिद्दीकी परिवार के अन्य सदस्यों, विशेष रूप से टोह सिद्दीकी, बुजुर्गों में सबसे प्रमुख और जिन्होंने अतीत में सीपीआई (एम) और टीएमसी को मदद की है, ओवैसी की यात्रा पर चुप्पी बनाए रखी। अब्बास सिद्दीकी के बड़े चचेरे भाई में से एक ने कहा, “फुरफुरा शरीफ के लोग इस तरह से राजनीति का हिस्सा नहीं हो सकते।” 

आपको बता दें कि फुरफुरा शरीफ पीर अबू बक्र सिद्दीकी के मकबरे के आसपास बना है। यह 1375 में निर्मित एक मस्जिद भी है। फुरफुरा शरीफ उर्स त्योहार और पीर को समर्पित वार्षिक मेले के दौरान देश भर से लाखों लोगों को आकर्षित करता है।

ओवैसी ने बैठक के बाद मीडिया को बताया, “एआईएमआईएम अब्बास सिद्दीकी के पीछे खड़ा होगा। हम उनके साथ काम करेंगे और उन्हें मजबूत करेंगे। मैंने सिद्दीकी को सभी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ने का फैसला किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि बिहार में हमने जो हासिल किया है, उसके मुकाबले हमारा प्रदर्शन यहां भी तुलनात्मक होगा। केवल अल्पसंख्यक वोट हमारा लक्ष्य नहीं है। हम आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए भी लड़ना चाहते हैं। अगर कोई भाजपा को रोक सकता है, तो वह सिद्दीकी है।”

बंगाल की मुस्लिम आबादी 2011 की जनगणना के दौरान 27.01% थी और अब बढ़कर लगभग 30% होने का अनुमान है। मुस्लिम आबादी मुख्य रूप से मुर्शिदाबाद (66.28%), मालदा (51.27%), उत्तर दिनाजपुर (49.92%), दक्षिण 24 परगना (35.57%), और बीरभूम (37.06%) जिलों में केंद्रित है। दार्जिलिंग, पुरुलिया और बांकुरा में, जहां भाजपा ने पिछले साल लोकसभा सीटें जीती थीं, मुसलमानों की आबादी 10% से भी कम है।

AIMIM की अधिकांश नई शाखाएं मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर में स्थित हैं, जबकि सिद्दीकी के अनुयायी पूरे दक्षिण बंगाल में फैले हुए हैं।

बीजेपी और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के आई-पैक के सर्वेक्षणों के मुताबिक, मुस्लिम वोटों में स्विंग 100 से अधिक सीटों पर चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है। 2019 में लोकसभा की 42 सीटों में से 18 पर भाजपा की जीत के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2021 की चुनावी तैयारियों के लिए प्रशांत किशोर से करार किया।

टीएमसी सरकार में मंत्री और बंगाल के सबसे प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलमा-ए-हिंद के नेता सिद्दीकुल्ला चौधरी ने एचटी को बताया कि ओवैसी का राज्य की राजनीति में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा, “AIMIM का संबंध बंगाल से नहीं है। ये मुस्लिमों में विभाजन पैदा करने की रणनीति है, लेकिन यह काम नहीं करेगा। इसके अलावा, वामपंथी शासन के दौरान राजनीतिक झड़पों में हजारों मुसलमान मारे जाने पर अब्बास सिद्दीकी कहां थे? मुझे यकीन है कि सिद्दीकी परिवार के अन्य सदस्य अब्बास का समर्थन नहीं करेंगे।”

शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा, “न तो सिद्दीकी और न ही एआईएमआईएम बंगाल पर शासन कर सकते हैं। वे केवल भाजपा की मदद कर सकते हैं। हमने यह उत्तर प्रदेश और बिहार में होता देखा है। ”

एक रैली के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, “ओवैसी किसी भी पार्टी में जा सकते हैं या कहीं भी चुनाव लड़ सकते हैं। भाजपा चिंतित नहीं है। टीएमसी चिंतित है, क्योंकि वह मुस्लिम वोट बैंक को अपनी संपत्ति मानता है। अगर टीएमसी ने वास्तव में मुसलमानों के कल्याण के लिए काम किया है तो इसे चिंतित क्यों होना चाहिए? “

वहीं, ओवैसी ने बीजेपी से सांठगांठ के आरोंपा को खआरिज करते हुए कहा कि उनका या उनकी पार्टी का भाजपा से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “AIMIM ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा और फिर भी भाजपा ने 18 सीटें जीतीं। यह कैसे हुआ? ममता बनर्जी अपनी पार्टी का प्रबंधन भी नहीं कर सकती हैं। उनके विधायक और सांसद हर दिन भाजपा में शामिल हो रहे हैं। हमारा उद्देश्य भाजपा को रोकना है।”

मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले के बेरहमपुर सीट से तीन बार के कांग्रेस विधायक मनोज चक्रवर्ती ने कहा, “ओवैसी भाजपा के एजेंट हैं। उनका एकमात्र काम मुस्लिम वोटों का विभाजन करना है।”

By anita

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