सीमा पर तनाव के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र से चीनी कंपनियो को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद केंद्र सरकार आत्मनिर्भर भारत के तहत भारतीय कंपनियों आगे बढ़ा रही है। इसके लिए निविदा नियमों को सरल किया जा रहा है, जिससे कंपनियां सड़कों का ठेका लेने योग्य बन सकेंगी। वहीं, प्रतिभूति राशि में कमी व भुगतान प्रक्रिया को असान बना दिया गया है। इससे नए साल में देश के राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र को पंख लगेंगे।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने चीनी कंपनियों पर राजमार्ग परियोजनाओं के ठेका देने पर प्रतिबंध लगाने के बाद उक्त परियोजनाओं के ठेके रद कर पुन: निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि किसी भी निर्माण कंपनी की तकनीकी-वित्तीय स्थिति व कार्य अनुभव के आधार पर निविदा प्रक्रिया के लिए योग्य माना जाता है। बड़ी राजमार्ग परियोजना में भारतीय कंपनियां सालाना टर्न ओवर (वित्तीय स्थिति), सड़क निर्माण का अुनभव नहीं रखने, तकनीकी अभाव आदि के कारण बड़ी राजमार्ग परियोजनाओं की निविदा में योग्यता हासिल नहीं कर पाती हैं। जिससे उनके हाथ से राजमार्ग परियोजनाओं के ठेके छूट जाते हैं, लेकिन सरकार के आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत निविदा नियमों में बदलाव किया जा रहे हैं, यह प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है। इससे भारत की तमाम कंपनियां छोटी-बड़ी सड़क परियोजनाओं का ठेका लेने के योग्य हो जाएंगी।

इतना ही नहीं नियमों में बदालव से गैर राजमार्ग क्षेत्र की कंपनियों को भी सड़क बनाने का मौका मिलेगा। नए साल में बड़े पैमाने पर देश की कंपिनियों को राजमार्ग परियोजनाएं देने की योजना है। इससे कोरोना के बाद एक बार फिर राजमार्ग क्षेत्र पूरी गति से काम करेगा। वहीं, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

इसके साथ ही सड़क परिवहन मंत्रालय ने 31 दिसंबर को जारी परिपत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्मण क्षेत्र की कंपनियों-ठेकेदारों को अगले छह महीने (जून) तक कई प्रकार की राहत देने का फैसला किया है। इसमें ठेकेदारों को प्रति माह किए गए निर्माण कार्यो का भुगतान किया जाएगा। परियोजना में देरी होने पर पेनल्टी लगाने के बजाए समय दिया जाएगा। प्रतिभूति राशि को आधा कर दिया गया है। इससे आपूर्तिकर्ता, कामगारों-मजदूरों को समय पर पैसा मिलने से व्यापार को गति मिलेगी।

By anita

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