मध्य प्रदेश कैबिनेट ने शनिवार को लव जिहाद विरोधी विधेयक ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020’ ( मप्र फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट 2020) को मंजूरी दे दी। इस कानून के तहत महिलाओं, नाबालिगों और एससी-एसटी समुदाय के लोगों से जबरन धर्मांतरण करवाने वालों को 10 साल की सजा का प्रावधान है लेकिन यह कानून उन लोगों को सजा नहीं देगा जो ‘घर वापसी’ करेंगे। यानी वे लोग जिन्होंने अपने पूर्वजों का धर्म अपनाया हो, सजा के हकदार नहीं होंगे।

बिल के मुताबिक, ‘पैत्रिक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।’ कानून में पैत्रिक धर्म उसे माना गया है जो संबंधित व्यक्ति के पिता का उनके जन्म के समय धर्म रहा हो। यह विधेयक 28 दिसंबर से प्रस्तावित विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। 

कानून में इस प्रावधान का कारण बताते हुए मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि अपने पैत्रिक धर्म को दोबारा अपनाना दंडनीय इसलिए नहीं है क्योंकि यह अपराध से ज्यादा गलती का एहसास है।

प्रस्तावित कानून मध्य प्रदेश के फ्रीडम ऑफ रिलीजन ऐक्ट, 1968 की जगह लेगा और यह उत्तर प्रदेश के लव जिहाद कानून से भी ज्यादा सख्त है। 

क्या हैं प्रावधान? 
नए कानून में कुल 19 प्रावधान हैं, जिसके तहत अगर धर्म परिवर्तन के मामले में पीड़ित पक्ष के परिजन शिकायत करते हैं तो पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। अगर किसी शख्स पर नाबालिग, अनुसूचित जाति/जनजाति की बेटियों को बहला फुसला कर शादी करने का दोष सिद्ध होता है तो उसे दो साल से 10 साल तक कि सजा दी जाएगी। अगर कोई शख्स धन और संपत्ति के लालच में धर्म छिपाकर शादी करता हो तो उसकी शादी शून्य मानी जाएगी। अपराध गैर जमानती होगी।

माता-पिता, भाई-बहन की शिकायत के अलावा न्यायालय की अनुमति से मत परिवर्तित व्यक्ति से संबंधित (रक्त, विवाह, दत्तक ग्रहण, अभिरक्षा में हो) व्यक्ति की शिकायत पर जांच होगी। विवाह शून्य होने की स्थिति में महिला और उसके बच्चों को भरण पोषण का हक मिलेगा। किसी भी व्यक्ति के अधिनियम का उल्लंघन करने पर एक से पांच साल का कारावास एवं कम से कम 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित करने का प्रविधान रखा गया है।

अपना मत छुपाकर अधिनियम का उल्लंघन करने पर तीन से दस साल का कारावास एवं 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा मिलेगी। मतांतरण के उद्देश्य से किए गए विवाह से पैदा हुए बच्चों को पिता की संपत्ति में उत्तराधिकारी के रूप में अधिकार बरकरार रहेगा।

कितनी होगी सजा?
किसी भी व्यक्ति द्वारा अधिनियम की धारा 03 का उल्लंघन करने पर 01 वर्ष से 05 साल की सजा और कम से कम 25 हजार रूपए का जुर्माना लगेगा। नाबालिग, महिला और एससी/एसटी केस में 02 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 50 हजार रुपए जुर्माना प्रस्तावित किया गया है। इसी तरह अपना धर्म छुपाकर ऐसा प्रयास करने पर 03 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 50 हजार रुपए जुर्माना लगेगा। सामूहिक धर्म परिवर्तन (02 या अधिक व्यक्ति का) का प्रयास करने पर 05 से 10 साल जेल और कम से कम 01 लाख रूपए के अर्थदण्ड का प्रावधान किया जा रहा है।

By anita

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